Rekhte ke Ustad : Bashir Badra - cover

Rekhte ke Ustad : Bashir Badra

Rekhta

  • 13 september 2021
  • 0408100115271
Wil ik lezen
  • Wil ik lezen
  • Aan het lezen
  • Gelezen
  • Verwijderen

Samenvatting:

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है अभी तुझ से मिलता-जुलता कोई दूसरा कहाँ है क़ुदरत ख़ूबसूरत है और ख़ौफ़नाक है; ये बात घर में आग लगाने वालों को समझ में नहीं आती। हुआ यूं कि क़ौमी दंगे में बशीर बद्र के घर को आग के हवाले कर दिया गया । उस दौरान ऐसा बहुत कुछ जलकर राख हो गया जो इंसान के काम आ सकता था मगर इश्क़-नगर में ग़ुस्से का रिवाज नहीं है। मुहब्बत ने सब्र किया और बशीर बद्र ने शेर कहे । 1999 में बशीर बद्र को पद्मश्री से नवाज़ा गया। Written by Mohd Aqib

We gebruiken cookies om er zeker van te zijn dat je onze website zo goed mogelijk beleeft. Als je deze website blijft gebruiken gaan we ervan uit dat je dat goed vindt. Ok