ये कहानी है 12 साल के, क्रिकेट के दीवाने लड़के 'जादू' की जो उठते-बैठते हरदम क्रिकेट के बारे में सोचता रहता है. उसे अपने गाँव और वहाँ की क्रिकेट टीम से बहुत प्यार है. लेकिन जादू को अपने पापा के नये जॉब के चलते परिवार के साथ गाँव छोड़कर शहर आना पड़ता है. नया शहर, नये लोगों के बीच जादू खुद को बेहद अकेला पाता है. वहाँ उसका केवल एक दोस्त बनता है, टेपचू जो एक ढाबे पर काम करता है. पापा की लाख डांट सुनने के बाद भी उसका क्रिकेट के प्रति प्यार कम नहीं होता. वो बाकी बच्चों के साथ खेलना चाहता है लेकिन शहर के बच्चे उसे अपनी टीम में शामिल नहीं करते. जादू का क्रिकेट के लिए पैशन हर रोज उसके लिए एक नई मुसीबत लेकर आता है. क्या जादू का क्रिकेट खेलने का सपना कभी पूरा होगा? क्या वो उन शहरी बच्चों की टीम में शामिल हो पायेगा?