'रूकी ना तनूजा' कहानी पूर्ण रूप से एक हिम्मती व मेहनती बेटी पर आधारित है। इस कहानी के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि समाज में लड़कियों की भावनाओं को समझते हुये उन्हे अपने आप को साबित करने का मौका देना चाहिए। यह कहानी रूढ़िवादिता को भी समाप्त करने का प्रयास करती है। 'तनूजा' का अर्थ है 'बेटी'। कहानी एक ऐसी बेटी से ताल्लुक रखती है जो अपने आप को साबित करने के लिए अनेकों प्रयास करती है। तनूजा को शिक्षा में किसी भी प्रकार का बाध्य स्वीकार नहीं होता है, इसलिए तनूजा अपने शिक्षा को जारी रखने हेतु अपने मन की सुनते हुए, अपने हीत में निर्णय लेती है और मौका पाते ही खुद को साबित भी करती है। इनसब के साथ ही इस कहानी में यह भी दर्शाया गया है कि हमे अपने समाज को साक्षर बनाने में अपना योगदान देना चाहिए। एक शिक्षित समाज का निर्माण करना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं बल्कि अपने राष्ट्र ऋण से मुक्ति है। समाज में बेटी व बेटे को समान अवसर मिलना ही चाहिए और इसके लिए एक दृढ़ संकल्प लेने की आवश्यकता है क्यों कि, "दीपक संग ज्योति से अब हर घर को सजाना है, संकल्प सिद्धि के मार्ग से समाज को सुंदर बनाना है।"